औरत होने की सज़ा

shahroz  ka rachnasansaar महिलाओं के साथ बेइज़्जती’ कइयों ने नारी के सर दोष मढ़ने की कोशिश की है। उनका कहना है कि औरतें इन दिनों खुद ही भोगवस्तु बनने को उतारू हैं। अपनी चालढाल से पुरुष को अपनी ओर आकर्षित करने की चेष्टा करती है। किसी हदतक इसे स्वीकार किया जा सकता है। यह मौजूदा... [पूरी पोस्ट]
writer शहरोज़
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[11 Dec 2009 06:16 AM]

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