प्रि‍ये! तुम्हारे लि‍ए.......

अरे बिरादर !! सच कहूँ तो फुर्सत मि‍ली नहीं कि‍ याद तुम्हें कर पाऊँ पर जो कुछ भी कर रहा हूँ ये सब तुम्हा रे लि‍ए है। मैंने कभी नहीं कहा था तुम्हारे लि‍ए तोड़ लाऊँगा चॉंद-तारे। सच तो ये है कि‍ तुम तक पहुँचने के लि‍ए अपने हाथों से मुझे बनानी पड़ रही है सड़क ............ [पूरी पोस्ट]
writer जितेन्द़ भगत

बन्नो तेरी अंखियां

views
41
upvote
7
downvote
0
rating
7
comments
11
[11 Dec 2009 03:56 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix