मुल्ला देख या.....

योगेंद्र मौदगिल मुल्ला देख या पण्डे देख. लिये धरम के डण्डे देख. आहट हुई इलैक्शन की, बस्ती-बस्ती झण्डे देख. राजनीत का प्रेत चढ़ा, खादी वाले गण्डे देख. कहे भारती रो-रो कर, पूत हुए मुश्टण्डे देख. जंगल का कानून समझ, या शहरी हथकण्डे देख. सफल कैबरे, हूट कवि, सड़े टमाटर-अण... [पूरी पोस्ट]
writer योगेन्द्र मौदगिल

ग़ज़ल

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[11 Dec 2009 03:52 AM]

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