ज़िन्दगी
ज़िन्दगी कभी समतल ज़मीं पर नहीं चलती उस के मायने खो जाते हैं तूफानों की तोड़फोड़ ज़िन्दगी की दिशा बनती है रिश्तों के गुमनाम अनजाने पलों से आत्मविश्वास की लौ निकलती है...
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रश्मि प्रभा...
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[11 Dec 2009 03:52 AM]



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