मिर्ज़ा ग़ालिब जी के कुछ शेर

मिर्ज़ा ग़ालिब सताइशगर है ज़ाहिद इस क़दर जिस बाग़े-रिज्वाँ का, वह इक गुल्दस्त: है हम बेखु़दों के ताक़े-निसियाँ का । ग़ालिब ने बार बार स्वर्ग एवं स्वर्ग में प्राप्त चीजों की हँसी उड़ाई है । यहाँ भी वे कहते हैं कि ज़ाहिद (परहेज़गार, संयमी) जिस स्वर्गोद्यान की इतनी प्रशं... [पूरी पोस्ट]
writer अनिल कान्त :
views
28
upvote
4
downvote
0
rating
4
comments
8
[11 Dec 2009 01:30 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix