मेरे पिता और पक्षी फीनिक्स

खुली खिड़की कुछ दिन पहले मैं अहमदाबाद के रेलवे स्टेशन पर खड़ा बठिंडा को जाने वाली रेलगाड़ी का इंतजार कर रहा था, मैं खड़ा था, लेकिन मेरी नजर इधर उधर जा रही थी, लड़कियों को निहारने के लिए नहीं बल्कि कुछ ढूंढने के लिए, जो खोया भी नहीं था। इतने में मेरी निगाह वहां पर स्... [पूरी पोस्ट]
writer कुलवंत हैप्पी

पिता

views
43
upvote
6
downvote
0
rating
6
comments
2
[11 Dec 2009 00:32 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix