कवि-सम्मेलन में आज हाज़िर है कात्यायनी की कविता "या कि होगा ?"
एक दिन पर्यावरण की सुरक्षा पर कोई कार्यक्रम नहीं हुआ । जनसँख्या - विस्फोट पर नहीं प्रकट की गई कोई चिन्ता । कला की शर्तें पूरी करने के लिए नीलामी नहीं बोली गई सच की , या ईमान की एक दिन मृत्यु नहीं हुई किसी कवि की या कविता की नहीं बैठा कोई विद्वान किसी...
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[10 Dec 2009 23:59 PM]



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