भर्तृहरि शतक-अपना लक्ष्य बीच में नहीं छोड़ें (hindu dharm sandesh-apna lakshya
रत्नैर्महाहैंस्तुतुषुर्न देवा न भेजिरेभीमविषेण भीतिम्। सुधा विना न प्रययुर्विरामं न निश्चिततार्थाद्विरमन्ति धीराः।। हिन्दी में भावार्थ- समुद्र मंथन करने से देवता लोग अनमोल रत्न पाकर भी प्रसन्न नहीं हुए। भयंकर विष भी निकला पर उनको उससे भय नहीं हुअ और...
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दीपक भारतदीप
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[10 Dec 2009 23:44 PM]



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