व्यंग्य को आलोचना की बैसाखी की जरूरत नहीं

इयत्ता हिन्दी व्यंग्य एवं आलोचना पर लखनऊ में यह राष्ट्रीय संगोष्ठी हुई तो थी 30 नवंबर को ही थी और इसकी सूचना भी भाई अनूप श्रीवास्तव ने समयानुसार भेज दी थी, लेकिन मैं ही अति व्यस्तता के कारण इसे देख नहीं सका और इसीलिए पोस्ट नहीं कर सका. अब थोड़ी फ़ुर्सत मिलने... [पूरी पोस्ट]
writer इष्ट देव सांकृत्यायन

Satire

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[10 Dec 2009 19:45 PM]

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