क्षणिकाएँ-२

अनुभूति कलश १- मौसम के रंग , निश्चित समय पर बदलते हैं, पर रिश्तों के रंग तो पल-पल बदलते हैं। २- रेखाएँ खींचना मगर, हथेली की लकीरों की तरह, कम से कम मिल सकें , कहीं पर तो हम। ३- धरती की परिधि पर, सूर्य की तरह चक्कर मत काटना, मिलन के लिए, परिधियों का टूटना, ज़रूरी... [पूरी पोस्ट]
writer ramadwivedi

क्षणिकाएंक्षणिकाएँ-२

views
19
upvote
1
downvote
0
rating
1
comments
2
[10 Dec 2009 14:05 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix