खून से लिखा हुआ भी बे-असर होता है अब

Hamzabaan हमज़बान आजकल सलीम खान नामक सज्जन से ढेरों लोग नाराज़ हैं!! भाई अविनाश ने तो महल्ला से ही उन्हें खारिज कर दिया! लेकिन उनका दर्द क्या है। एक शे'र ज़ेहन में उतर ता है: तुमको मालूम नहीं है दिल को दुखाने वाले यह जो मज़लूम हैं आहों में असर रखते हैं ! उनकी एक मेल मिल... [पूरी पोस्ट]
writer शहरोज़

बहस

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[10 Dec 2009 13:17 PM]

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