यादों का पहाड़
पहाड़ से नीचे उतरते हुऐ दूर तक दिखते छोटे-छोटे घर जहाँ कैद है अभी भी कुछ भूली-बिसरी यादें । दूर तक फैला हुआ कुहासे में लिपटा गुमशुदा शहर जहाँ से बच निकला था मैं कभी । घुमावदार सड़कों पर फिसलती बस और इन सड़को से भी ज्यादा टेढ़ी-मेढ़ी यह जिन्दगी । जिन्दगी क...
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चंदन कुमार झा
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[10 Dec 2009 13:16 PM]



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