बेहतर है मुझे लौटा देना ख़त मेरे जलाने से पहले.

डॉ.सुभाष भदौरिया.अहमदाबाद. ग़ज़ल दिल से भी मिटाओ तो जाने, ये नक़्श मिटाने से पहले. बेहतर है मुझे लौटा देना, ख़त मेरे जलाने से पहले . तबियत भी है उखड़ी, उखड़ी मुखड़ा भी है फीका-फीका, सरकार मेरे क्यों गुमसुम हैं अहवाल सुनाने से पहले. घर वीरां करके कहते हैं, घर अपना बसा लेना तुम... [पूरी पोस्ट]
writer डॉ.सुभाष भदौरिया.
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[10 Dec 2009 07:18 AM]

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