नया कुछ नहीं
प्यार से और बढ़कर नशा कुछ नहीं; रोग ऐसा कि जिसकी दवा कुछ नहीं। जिस दिये को जलाकर रखा प्यार ने, उसको तूफान आँधी हवा कुछ नहीं। जान तक अपनी देता खुशी से सदा, प्यार बदले में खुद माँगता कुछ नहीं। जिसने तन मन समर्पण किया प्यार को उसको दुनिया से है वास्ता क...
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chandrabhan bhardwaj
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[10 Dec 2009 06:06 AM]



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