एक नज़्म
उनसे बिछडे हुए एक अरसा हुआ उनको देखे हुए इक ज़माना हुआ लोग कहते हैं हम उनके दीवाने हैं वो शमा और हम उनके परवाने हैं प्यार उनके लिए मेरी आंखों में है मेरा दिल मेरी जान उनकी सांसों में है वह संवरती थी हम को दिखाने की ख़ातिर ऐसे चलती थी हम को लुभाने की...
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Razi Shahab
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[10 Dec 2009 04:49 AM]



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