दिलीप चित्रे नहीं रहे !

बाजे वाली गली आख़िर कोई ख़बर इतनी बुरी कैसे हो सकती है ? इतनी बुरी कि वह कहने लगे कि दिलीप चित्रे नहीं रहे ! इतनी बुरी ख़बरों का गला क्यों नहीं घोंट दिया जाता ? ऐसी तमाम बुरी ख़बरों को पैदा होने की इजाज़त नहीं मिलनी चाहिए जो दुनिया की हर अच्छी चीज़ को मौत देती हों. कुछ... [पूरी पोस्ट]
writer raajkumar keswani
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[10 Dec 2009 00:54 AM]

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