दो दोहे गोस्वामी तुलसी दास के..........

Kavi Sammelan तुलसी के दोहे स्वारथ के सब ही सगे , बिन स्वारथ कोई नाहिं सेवें पक्षी सरस तरु , निरस भये उड़ जाहिं नीच नीच सब तरि गए , सन्त चरण लौलीन जातिहि के अभिमान ते , डूबे बहुत कुलीन रचयिता - गोस्वामी तुलसी दास प्रस्तुति - अलबेला खत्री... [पूरी पोस्ट]
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[10 Dec 2009 00:41 AM]

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