पंकज सुबीरजी- प्रणय वर्षगाँठ शुभ हो

गीतकार की कलम श्वेत पत्रों पे बैठी हुई शारदा, बीन के राग में गीत गाती रहे रक्त वर्णी किये पांखुरी, विष्णु की प्रियतमा पायलें झनझनाती रहे ज्योत्सना की परी आ धरा पे रँगे चान्दनी की किरन से दिवस आपके और रेखा स्वयं जयश्री बन सदा, आपके भाल टीका लगाती रहे   शुभकामन... [पूरी पोस्ट]
writer राकेश खंडेलवाल
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[09 Dec 2009 21:14 PM]

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