कोई संग इमाम खुदा ने बख्‍शा ना ...मगर संग है गुरु जी के विवाह की वर्षगाँठ

हृदय गवाक्ष ये अच्छा हुआ कि अपनी गज़ल के चक्कर में इतनी बार गुरु जी को फोन करना पड़ा कि इस डर से कि कहीं कल भी मुझे बार बार फोन कर के पकाये ना गुरु जी ने अपरोक्ष रूप से प्रकट किया कि कल अर्थात आज उनकी शादी की सालगिरह है और प्रवेश वर्जित खैर... ऐसा गुरु जी ने कुछ... [पूरी पोस्ट]
writer कंचन सिंह चौहान

गज़ल

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[09 Dec 2009 19:32 PM]

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