मौहब्बत और फैंशन.
मौहब्बत से कहो, बातें तेरी सब मान लेते हैं। मगर हर बात पर क्यूँ , हमारी जान लेते हैं। बहुत उम्मीद थी, राहों में, चिरागे रोशनी होगी, मगर हर बार अंधेरों का दामन थाम लेते हैं। बहुत मजबूर हैं दिल से, यहाँ चलना जरूरी है, ठहर जाए अगर कोई, मुर्दा मान लेते ह...
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परमजीत बाली
परमजीत बाली
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[09 Dec 2009 19:28 PM]



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