हंगर ज़ीरो
कल मानव अधिकार दिवस है। हम कैसे इस दिवस को मना सकते हैं जब हम लोगों को दो जून की रोटी नहीं दे पाए हैं। इस निजाम ने तो इनसान के निवाले छीनने शुरू कर दिए हैं। दाल-रोटी के ही दाम आसमान चीरते जा रहे हैं। अधिकारों की बात तो तब हो, जब पेट भरा हुआ हो। महंगा...
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Dileepraaj Nagpal
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[09 Dec 2009 12:21 PM]



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