इतनी दूर तक जगने वाले
इतनी दूर तक जगने वाले सोने कि तू बात न कर जीवन तो एक दरिया है पर डूबने कि तू बात न कर माना कि गम के बादल हैं मज़बूरी है बरस रही एक-एक बूंद कि खातिर सीप जीवन कि तरस रही बस तू पर्वत सा बन जा यूँ बहने कि बात न कर . इतनी दूर....... सुबह तो फिर भी आती है प...
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aarya
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[09 Dec 2009 11:29 AM]



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