ग़ालिब : रदीफ़ नून
वह फुराक़ और वह विशाल कहाँ, वह शबोरोज़ो-माहोसाल कहाँ ? दिल तो दिल, बस दिमाग भी न रहा, शौरे-सौदाए-ख़त्तो-ख़ाल कहाँ ? थी वह इक शख़्स के तसव्वुर से अब वह रा'नाइए ख़याल कहाँ ? * शौरे-सौदाए-ख़त्तो-ख़ाल कहाँ ? = वह रूप के प्रति उन्माद की धूप अब कहाँ है ? रा'ना...
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अनिल कान्त :
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[09 Dec 2009 05:14 AM]



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