हिंदी का बुद्धिजीवी

अनूप सेठी लेखक संगठनों के पुनर्गठन का मसला इस संपादकीय के साथ जोड़ कर देखा जाएगा तो परिवर्तन की जरूरत और शिद्दत से महसूस होगी. माहौल को गरियाना , राजनीति को लतियाना , युवा पीढ़ी पर बिगड़ जाने के फतवे जारी करना और फिर व्यवस्था के मत्थे दोष मढ़ देना एक फैशन है।... [पूरी पोस्ट]
writer anup

संपादकीय

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[09 Dec 2009 03:14 AM]

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