ग़ालिब की कलम से शेर
है कहाँ तमन्ना का दूसरा क़दम यारब ! हमने दश्ते-इम्काँ को एक नक़्शेपा पाया । कहते हैं - हे ईश्वर ! संभावनों का जंगल तो उसका (कामना) एक चरण चिन्ह है, तब तमन्ना (कामना) का दूसरा चरण कहाँ है ? एक ही चरण में संभावनों की समस्त भूमि, वामन भगवान की भाँति उसन...
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अनिल कान्त :
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[09 Dec 2009 00:43 AM]



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