अनुभूति

मनोरमा कभी जिन्दगी ने मचलना सिखाया मिली ठोकरें तो सम्भलना सिखाया सम्भलकर के जीना कठिन जिन्दगी में उलझ भी गए तो निकलना सिखाया महफिल है रंगों की जहाँ जिन्दगी है गिरगिट के जैसे बदलना सिखाया सबकी खुशी में खुशी जिन्दगी की खुद की खुशी में बहलना सिखाया बहुत दूर मि... [पूरी पोस्ट]
writer श्यामल सुमन
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[08 Dec 2009 21:46 PM]

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