एक जलजला है दीदों में , दीदार नहीं होता
तीस सितम्बर सन ९३ की बात है जब किल्लारी को दुनिया जान गयी थी। लातूर जिले का यह क़स्बा तबाह हो गया था। इमारतें चूरा हो गयीं और जिंदगी बेमानी। तब भी आया था और आज फ़िर लौटा हूँ, इंसान के पास अल्लाह है और पेट है, एक से भरोसा आता है दूसरे कोलेकर जीता है। वह...
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rajkumar jha
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[08 Dec 2009 20:50 PM]



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