Ismat Zaidi "Shefa kajgaonvi
एक ग़ज़ल पेशे ख़िदमत है ..................... ग़ज़ल -___________________ आज का तिफ़्ल ओ जवाँ ही और है ख्वाहिशों की कहकशां ही और है उन लबों पर मुस्कराहट है तो क्या दिल में इक दर्दे नेहाँ ही और है बेच कर आया हूँ मैं अपना ज़मीर आज एहसासे ज़ियाँ ही और ह...
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इस्मत ज़ैदी
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[08 Dec 2009 14:03 PM]



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