आयम यूअर मैन..
अच्छा लगता है कि बाज़ार के शोर और बेमतलब बकलोलियों के इस दौर में अब भी रहते-रहते ऐसी फ़िल्म से टकरा जायें कि मन में तरावट फैल जाये, फ़िल्म के खत्म हो चुकने के बाद भी देर तक मन में कैसी तो अच्छी शराब पिये का असर बना रहे.. कुछ दिनों पहले अभय की...
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Pramod Singh
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[08 Dec 2009 12:34 PM]



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