ज़िन्दगी हमारी रोज़ क्लास लेती है..

मेरे विचार, मेरी कवितायें कुछ पुराने पन्ने है…जिन पर धूल जमा हो गयी है आजकल कोई इस ज़िन्दगी को नही पढता…आज आफ़िस नही जा पाया तो सोचा चलो थोडी ज़िन्दगी की सफ़ाई हो जाय…… वो ’बान्केलाल ग्रुप’ …एक कन्या ने हमारे ग्रुप को ये नाम दिया था…क्यूकि हम हसते थे और हसाते थे :) मै उस ग्रुप का... [पूरी पोस्ट]
writer Pankaj Upadhyay
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[08 Dec 2009 11:13 AM]

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