मज़ा कुछ और है
चलिए ब्लॉग के दूसरे वर्ष कि शुरुआत करते हैं आजही लिखी इस रचना से. आज अरहर कि दाल और चावल खाने कि इच्छा हुई सुबह सुबह पत्नी से कविता में इसकी मांग कर बैठे , मांग क्या कर बैठे मुखड़ा भा गया और इस रचना ने पदार्पण किया , गौर फरमाए...
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योगेश स्वप्न
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[08 Dec 2009 11:01 AM]



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