ऐसा भी क्या....
कंकरीट के चौबारे में, अद्भुत है नक्कासी. रौशनदान में अटकी चिड़िया, मर गई भूखी प्यासी.. इतनी सुविधा के हित खरचा-चर्चा चौबीस घंटे. दिन में गाहक, रात फैक्टरी, भैय्या के सब टंटे.. बाबा भेज दिये भैय्या ने उल्टे पैरौं गांव, मैली छत की हंसी उड़ाती, बरसाती क...
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योगेन्द्र मौदगिल
kavita
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[08 Dec 2009 03:26 AM]



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