अवधी उपन्यास - क़ासिद (7)
दुबई सहर। दोपहरि हुइगै औ सूरज जि तना जेठ म अपने हियां तपति है, वहिते कई दर्जा ऊपर सूरज दुबई म तपि रहा। सड़क पर हिया हुआं याक दुई मज़ूर दिखाई परति हैं औ जिनका बहुत ज़रुरी है वेई घर ते बाहर निकरे हैं। चाहे पैदरि होय या फिर एसी कारन मइहां। दुबई म दौलत स...
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पंकज शुक्ल
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[07 Dec 2009 11:58 AM]



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