आत्मा की डायरी से (जिसे जुबां ना कह सकी)

मेरी कलम - मेरी अभिव्यक्ति कभी कभी मन करता है कि कई दिनों तक और कई रातों तक सोता रहूँ । इतना कि इस सोते रहने की सोच से निजात मिले । हर गम और हर परेशानी उस सोते हुए दिन रात में घुल जाए, चाहे कितने भी बुरे से बुरे स्वप्न आयें और मैं उन्हें देखूं, ख़ुद को मरते हुए, जीते हुए, तडपत... [पूरी पोस्ट]
writer अनिल कान्त :
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[07 Dec 2009 11:19 AM]

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