बापू सुन ले!

अंतर्द्वंद का आइना बापू! तू ये क्या लाया है? सवारों की गालियाँ सुनता तू, सवारों को गलियां देता तू, कभी-कभी हाथापाई करता तू जो पैसे कमाता है; उनसे लाई ये टाफियाँ, ये कापियाँ मुझे गालियों जैसी लगती हैं, लातों और थप्पडों जैसी लगती है। बापू! तू क्यों रिक्सा चलता है?... [पूरी पोस्ट]
writer knkayastha
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[07 Dec 2009 04:04 AM]

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