तेरे अफसाने भी न! त्रिवेणी!
मुझको रुलाने ये फिर आ गए हैं, रात भर जगाने ये फिर आ गए हैं, ! ! ! तेरे अफसाने भी न दुश्मन मेरे हैं॥...
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nadeem
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[07 Dec 2009 03:47 AM]



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