अमिताभ जी और सुशील की जुगलबंदी की मुम्बई

तलाश ये मुम्बई हैं मेरे यार  देख रहा हूँ रेल की पटरियों पर तारकोल की सड़को पर लोगों को भागते-दोड़ते हुए। हवा गाती नहीं इनकी साँसों में हँसी नाचती नहीं इनके चेहरों पर। रेल में बैठी लड़की की लटे हवा में लहरा रही आँखे उसकी नींद की थाप पर झपक-झपक जा रही।... [पूरी पोस्ट]
writer सुशील कुमार छौक्कर

अमिताभ जी

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[06 Dec 2009 23:15 PM]

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