तुम यौवन की राजकुमारी में पीड़ा शहजादा हूँ
मन प्रियतम का प्रेम पिपासु तुम्हें निहारूं प्रियतम सभागार में बोलूँ कैसे ? नयनन से गुहारूँ प्रियतम ### तुम यौवन की राजकुमारी में पीड़ा शहजादा हूँ हिरनी से भी अधिक चपल तुम, मर्यादा से मैं तागा हूँ भय वश भाग न जाओ मुझसे कैसे तुम्हें प...
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गिरीश बिल्लोरे 'मुकुल'
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[06 Dec 2009 16:40 PM]



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