आखिर बुझ गया...
वो दीया, हाँ वही, जो जलता आ रहा है, आंधी, पानी, तूफ़ान, सब झेल गया, और जलता ही रहा, इस उम्मीद में, के इक दिन पायेगा, तेरे हाथों की छाँव, और अमर हो जायेगा, हमेशा हमेशा के लिए... वो दीया!!! आज हवा के, एक हल्के झोंके ने, बुझा दिया उसको, हाँ, ठीक सम...
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अम्बरीश अम्बुज
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[06 Dec 2009 14:02 PM]



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