अवधी उपन्यास - क़ासिद (6)
दादी तख्त प बैठे लकड़ी कि रिहल पर धरी रामचरित मानस पढ़ि रहीं। पासै म बाई काम करि रही। टिल्लू तख्त पर बैठि हैं। स्कूल केरि यूनीफॉर्म पासै म परी है, इ केवल कच्छी पहने तख्त प बैठ हैं। सब किताबें पूरे तख्त प हियन हुअन फैली परी हैं। दादी क रामचरित मानस पा...
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पंकज शुक्ल
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[06 Dec 2009 10:36 AM]



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