आभार ऐशो [ फिर आना ]
आभार ऐशो [ फिर आना ] सुबह का सूरज आज जब मुझे जगाने आया तो मैंने देखा वो उदास था मैंने पुछा तो बुझा बुझा सा वो कहने लगा .. मुझसे मेरी रौशनी छीन ले गयी है ; कोई तुम्हारी चाहने वाली , जिसके सदके मेरी किरणे तुम पर नज़र करती थी !!! रात को चाँद एक उदास बदली...
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Vijay Kumar Sappatti
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[06 Dec 2009 09:27 AM]



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