कुछ भी शाश्वत नही
शहर के बाहरी छोर पर बने कैफेटेरिया से , अपने दोस्त के साथ एक बेहद आत्मीय सम्बन्ध का औपचारिक समापन कर वो वापस लौट रहा था . दोनों ने वहीं मिलना तय किया था . एक एक कॉफ़ी और समापन की औपचारिक घोषणा . बड़ी विचित्र बात थी कि हाथ मिलाने की औपचारिकताओं से शुरू...
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sanjay vyas
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[06 Dec 2009 08:06 AM]



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