बिना वजूद के ही याद हो आये जो वो ड़ेजा वू है .....
हर शख्श के अपने जायज रंजो गम हैं ,गमे रोजगार और गमे मआश हैं ,हमारे आपके भी हैं और लवली कुमारी जी के भी हैं और इसके बाद और बावजूद भी जब वे समय निकाल कर ब्लॉग दुनिया के लिए योगदान करती हैं तो सहज ही साधुवाद की अधिकारिणी बन जाती हैं -अब चूंक...
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Arvind Mishra
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[06 Dec 2009 05:07 AM]



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