छह दिसंबर : दो कविताएं
छह दिसंबर, 1992 के सांप्रदायिक दावानल के बाद दो कविताएं लिखी थीं, जो कहीं प्रकाशित नहीं हुईं। आज सत्रह बरस बाद भी मैं वही पीड़ा और आक्रोश महसूस कर रहा हूं, जो उस वक्त इन कविताओं को लिखते समय था। समय कभी कम नहीं करता यादों के जख्म, बल्कि...
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प्रेमचंद गांधी Prem Chand Gandhi
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[06 Dec 2009 01:46 AM]



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