मैं, रात का ये पहर और वह
रात के इस पहर में जिसके बारे में कोई विशेषण मुझे अभी नहीं सूझ रहा है और ना हीं बहुत स्पष्ट है कि कविता के शुरुआत में इसे कितनी अहमियत दी जानी चाहिए और कितना विशेषण क्यूंकि हमेशा की तरह इस कविता में भी मुझे तुम्हारे बारे में कहना है या फिर तुम्हारे बि...
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ओम आर्य
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[06 Dec 2009 01:26 AM]



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