राह चलते एक छोटी सी ग़ज़ल

यादों का इन्द्रजाल... Hindi Poetry by Sulabh आंधियां जब तेज रही थी टहनियों में खलबली थी दरख़्त वही जगह पर रहे जड़े जिनकी खूब गहरी थी खुद को घायल पाया हमने हुस्न से जब नज़र मिली थी एक मुलाक़ात में दिल दे बैठे नाजनीन वो बड़ी हसीं थी सुबह तक डूबा रहा सूरज जाड़े की एक रात बड़ी थी सब ने अपने होश गंवाये... [पूरी पोस्ट]
writer सुलभ सतरंगी

ग़ज़ल

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[06 Dec 2009 00:51 AM]

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