प्राणों के रस से सींचा पात्र : बाउ (समापन किस्त)

सच्चा शरणम् एक आलसी का चिट्ठा - गिरिजेश भईया का चिट्ठा, स्वनाम कृतघ्न आलसी का चिट्ठा । यहाँ पहुँचते ही  होंगे -अवाक ! टिप्पणी को  विचारेंगे, होंगे किंकर्तव्य- विमूढ़ । अगिया बैताली और स्थितप्रज्ञ-दोनों एक साथ । बिलकुल बाउ की तरह ! बाउ, माने भईया का बनाय... [पूरी पोस्ट]
writer हिमांशु । Himanshu
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[05 Dec 2009 22:58 PM]

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