ग़ज़ल - अपने हाथों मुकद्दर बना कब सके

kavideepakgupta अपने हाथों मुकद्दर बना कब सके और ख़ुद को सिकंदर बना कब सके हम, फ़क़ीरों की दुनिया में आ तो गए ख़ुद को लेकिन कलंदर बना कब सके हम सभी ने मकां तो बनाये मगर हम मकां को कभी घर बना कब सके पत्थरों के नगर में रहे घूमते मील का ख़ुद को पत्थर बना कब सके मन तो क... [पूरी पोस्ट]
writer kavideepakgupta
views
19
upvote
1
downvote
0
rating
1
comments
5
[05 Dec 2009 22:46 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix