तस्वीरें कुछ बोलती हैं।

अंतर्ध्वनि जैसा कि हमने पिछली पोस्ट में बताया था कि आज हमें एक दस किमी की दौड में भाग लेना था। सुबह उठकर देखा तो कार के सभी शीशों पर बर्फ़ की मोटी परत जमी हुयी थी। जब खुरचने से नहीं उतरी और देर हो रही थी तो उस पर पानी डालने का सोचा। पानी डालने से खतरा था कि शीशा... [पूरी पोस्ट]
writer Neeraj Rohilla
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[05 Dec 2009 21:22 PM]

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