निर्माण
मैं कह देता हूँ अपनी बात । जब भी मन करता है कह देता हूँ । मैं नहीं जानता कि तुम तक पहुँच भी पाती है मेरी आवाज या नहीं । फिर भी चुप नहीं रह पाता मैं । मुझे पता है कि मेरी आवाज बहुत धीमी है । मुझे पता है कि जब भी बोलता हूँ शब्द लड़खड़...
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चंदन कुमार झा
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[05 Dec 2009 14:35 PM]



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